जूना अखाड़ा के साधुओं की हत्या से नाराज योगी ने उद्धव ठाकरे से की बात

महाराष्ट्र के पालघर में दो संतों सहित तीन जनों को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर निर्मम हत्या का मामला

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महाराष्ट्र सरकार ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश। अखाड़ा परिषद् ने महाराष्ट्र कूच करने दी चेतावनी। भीलवाड़ा के संत प्रधानमंत्री के नाम देंगे ज्ञापन। विभिन्न संगठनों ने की घटना की निंदा। 

जयपुर (विसं.)। महाराष्ट्र के पालघर में जूना अखाड़ा के दो साधुओं और उनके वाहन चालक की पीट-पीटकर हत्या का मामला सियासी रंग लेता जा रहा है। भाजपा के तमाम नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया आ रही थी और अब इस मामले में योगी आदित्यनाथ की भी एंट्री हो गई है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से फोन पर बात करके कहा है कि संतों के हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, पालघर, महाराष्ट्र में हुई जूना अखाड़ा के संतों स्वामी कल्पवृक्ष गिरि, स्वामी सुशील गिरि और उनके ड्राइवर नीलेश तेलगड़े की हत्या के संबंध में 19 अप्रैल की शाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात की और घटना के जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए आग्रह किया। योगी ने आगे लिखा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री द्वारा यह बताया गया कि कुछ लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं और शेष को चिह्नित कर सभी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र सरकार ने दिए पालघर ‘मॉब लिंचिग’ के उच्चस्तरीय जांच के आदेश

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी नीत सरकार ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मांग पर पालघर में हुई ‘मॉब लिंचिंग’ घटना की सोमवार को उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। हिंसक भीड़ की ओर से की गई इस हिंसा में महाराष्ट्र के पालघर की धनु तालुका में रविवार को पुलिस के सामने एक बुजुर्ग समेत तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई।

इस मुद्दे ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फड़नवीस और प्रवीण दरेकर ने ना केवल हत्याओं की निंदा की है, बल्कि राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की है। पीड़ितों को पुलिस के सामने हमला किये जाने की घटना को अमानवीय बताते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फड़नवीस ने इस घटना की जांच की मांग की और कहा कि दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

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पुलिस ने 101 लोगों को किया गिरफ्तार 

इस मामले में तीन प्राथमिकी दर्ज करते हुए पुलिस ने 101 लोगों को गिरफ्तार किया और एक स्थानीय अदालत ने सभी आरोपियों को 30 अप्रैल तक रिमांड पर भेज दिया है जबकि नौ अन्य किशोरियों को भिवंडी रिमांड घर भेज दिया गया है। इस बीच जिलाधिकारी कैलास शिंदे ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस की भूमिका की भी जांच की जाएगी। साथ ही यह भी पूछताछ की जाएगी कि तीनों इस लॉकडाउन के दौरान कैसे यात्रा कर रहे थे।

श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा ने महाराष्ट्र कूच करने दी चेतावनी

श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा ने केंद्र व महाराष्ट्र सरकार को अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा है कि जूना अखाड़े के संतों में पनप रहे गहरे आक्रोश को समुचित कार्रवाई से ही रोका जा सकता है। अखाड़ा के अध्यक्ष महंत नरेंद्रगिरी महाराज ने कहा है कि पुलिस की मौजूदगी में संतों को लाठीयों से पीट-पीटकर मार डाला और उनके पास से नकदी व स्वर्ण आभूषण लूट लिए। इस वारदात के मौके पर पुलिस स्वयं खड़ी थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वारदात ही पुलिस ने करायी है। ऐसे में पुलिस को भी आरोपी बनाकर अविलंब महाराष्ट्र सरकार को इस मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए और पुलिस के खिलाफ मामला पंजीबद्व करना चाहिए। संतों के हत्यारों के खिलाफ तुरन्त कड़ी कार्रवाई करने के लिए श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा ने महाराष्ट्र कूच करने चेतावनी दी है।

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जूना अखाड़े के संतों की हत्या किसी भी सनातन धर्मी को बर्दाश्त नहीं होगी : महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम

हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने महाराष्ट्र के पालघर में दो संतों सहित तीन लोगों की लाठी-डंडों से पीट कर हत्या करने के मामले पर गहरा दुःख व आक्रोश जताते हुए कहा है कि शिवसेना की सरकार में संत सुरक्षित नहीं है तो फिर उसे सरकार में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने आज एक प्रेस वक्तव्य जारी कर यह कहा है कि श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के दो संतों व उनके वाहन चालक की हत्या की वारदात से समूचे देश भर के साधु संतों व भक्तों में गहरा आक्रोश है। श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के संतों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप कर दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई कर उनको सजा देने व देश के सनातन संस्कृति के पोषक संतों को सुरक्षा देने की भी मांग की है। उन्होनें यह भी कहा है कि ऐसा न होने पर अब श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा की अगुवाई में देश के सभी संतों व भक्तगणों को सड़क पर उतर पर आंदोलन करने को भी मजबूर होना पड़ सकता है।

भीलवाड़ा के संत प्रधानमंत्री के नाम देंगे ज्ञापन

लॉकडाउन के चलते सोमवार को हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में विभिन्न संतों से बैठक बुलाकर व दूरभाष द्वारा वार्ता की गयी। इसमें महंत बाबूगिरी जी, महंत दीपकगिरी जी, महंत लक्षमणदास जी, महंत रामदास जी रामायणी, महंत बनवारीशरण जी काठिया बाबा व महंत आशुतोष जी शामिल हुए। अन्य संतों से दूरभाष पर वार्ता की है। सभी ने इस मामले को आगे की रणनीति पर विचार किया तथा भीलवाड़ा में संतों व भक्तों की ओर से प्रधानमंत्री के नाम पर ज्ञापन देने का निर्णय लिया।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने आश्चर्य जताया है कि यह वारदात पुलिस की मौजूदगी में होना देश के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि पुलिस स्वयं ही रक्षक बनने के बजाय मूकदर्शक की भूमिका में आ गयी और किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आयी जो कई सवाल खड़े करती है। स्वामी हंसराम उदासीन ने प्रश्न उठाया कि कोरोना लोक डाउन के बीच पालघर में लगभग 200 लोगों की भीड़ एक साथ वहाँ क्या कर रही थी?

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विभिन्न संगठनों ने की घटना की निंदा

अखिल भारतीय सिन्धु संत समाज ट्रस्ट के राष्ट्रीय महामंत्री महंत श्यामदास, श्री ईश्वर मनोहर उदासीन आश्रम के महन्त स्वरूपदास उदासीन, श्री शांतानन्द उदासीन आश्रम के महंत हनुमानराम, सन्त गौतमदास, ईश्वर गोविन्धधाम के स्वामी ईसरदास, निर्मलधाम के स्वामी आत्मदास, जतोई दरबार के भाई फतनदास, श्रीराम विश्वधाम के सांई अर्जुनदास, भारतीय सिन्धु सभा के राष्ट्रीय मंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल वाधवाणी, प्रदेश मंत्री युवा मनीष ग्वालाणी, अध्यक्ष नरेन्द्र बसराणी सोनू उदासी, सेवाधारी राहुल थावराणी, शंकर सबनाणी, सिन्धु समिति के अध्यक्ष जयकिशन लख्याणी, एडवोकेट अशोक तेजवाणी, झूलेलाल मन्दिर वैशाली नगर के अध्यक्ष प्रकाश जेठरा के साथ सनातन धर्मप्रेमियों ने महाराष्ट्र सरकार के शासन में पालघर में दो संतो सहित तीन लोगों की लाठी डंडो से पीट-पीटकर हत्या करने के मामले पर गहरा दुःख प्रकट करते हुये कहा कि देश भर के संतो में बहुत आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि हत्यारों को गिरफतार कर फासी की सजा दी जाये जिससे देश में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो सके अन्यथा मजबूरन देशभर में आंदोलन किया जायेगा।

क्या था पूरा मामला ?

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स्वामी कल्पवृक्ष गिरि, स्वामी सुशील गिरि और उनके ड्राइवर नीलेश तेलगड़े मुंबई से सूरत अपने साथी की अंत्येष्टि में शामिल होने जा रहे थे। दोनों साधुओं को ही अपने साथी का अंतिम संस्कार करना था। महाराष्ट्र गुजरात बॉर्डर पर लॉकडाउन के चलते इनकी गाड़ी को रोक लिया गया और वापस भेज दिया गया। इसके बाद तीनों ने सूरत जाने के लिए दूसरा रास्ता चुना। इसी बीच पालघर में अफवाह फैली कि कुछ अपराधी डकैती को अंजाम दे रहे थे।

जब इनकी गाड़ी धानु में कासा थाना के करीब गढ़चिंचले गांव के पास पहुंची तो इन्हें गांववालों ने घेर लिया और गाड़ी को तोड़फोड़ दिया और गाड़ी भी पलट दी। इसी बीच पुलिस वहां पहुंच गई। लेकिन इसके बावजूद भीड़ नहीं रुकी और हत्यारी भीड़ ने दोनों साधुओं सहित उनके वाहन चालक को चोर होने के शक में मार डाला, लेकिन इस बात से सभी लोग इतिफाक नहीं रखते हैं और साधुओं की हत्या की घटना को मॉब लिंचिग से जोड़कर देखा जा रहा है।

यह पूरी घटना वहां मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई। आरोपियों ने साधुओं के साथ एक ड्राइवर और पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। हमले के बाद साधुओं को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने मामले 110 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

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