Zoom ऐप इस्तेमाल करने के लिए गृह मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइंस

सरकार ने एडवाइजरी जारी कर कहा है कि वीडियो कॉलिग ऐप Zoom सुरक्षित प्लेटफॉर्म नहीं है

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गृह मंत्रालय ने कहा,  Zoom ऐप से सिक्योरिटी और प्राइवेसी दोनों को खतरा है

नई दिल्ली (विसं.)। कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान दुनियाभर में लोकप्रिय हो रहे Zoom वीडियो कांफ्रेंसिंग ऐप के इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्रालय के साइबर को-ओरडिनेशन सेंटर द्वारा एक एडवाइजरी जारी की गई है। यह एडवाइजरी इस ऐप के जरिए वीडियो कांफ्रेंसिंग करने वाले प्राइवेट सेक्टर और ऑनलाइन क्लासेस कराने वाले स्कूलों के लिए जारी की गई है।

दरअसल, पिछले महीने 24 मार्च से देश भर में लॉकडाउन की घोषणा की गई है। इससे पहले से ही कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने के लिए कही है। ऐसे में इस वीडियो कांफ्रेंसिंग ऐप का भारत में भी व्यापक तौर पर इस्तेमाल होने लगा है। पिछले दिनों इस ऐप से जुड़ी डाटा लीक्स के मामले सामने आने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय के साइबर को-ओरडिनेशन सेंटर द्वारा यह एडवाइजरी जारी की गई है।

सरकार ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को चेताया है कि Zoom मीटिंग ऐप वीडियो कांफ्रेंस के लिए सुरक्षित प्लेटफार्म नहीं है। सरकार ने इस बाबत गाइडलाइन जारी की हैं। जो उपयोगकर्ता जूम एप का इस्तेमाल निजी कार्यों के लिए करते हैं उनके लिए गाइडलाइंस जारी की गई हैं। बता दें कि लॉकडाउन के दौरान लोग इस एप का काफी ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

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इस एडवाइजरी में इस ऐप का इस्तेमाल बंद करने के लिए तो नहीं कहा गया है लेकिन यूजर्स को एहतियात बरतने के लिए कुछ निर्देश दिए गए हैं। एडवाइजरी में यह कहा गया है कि Zoom एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म नहीं है इसलिए यह एडवाइजरी जारी किया गया है।

इसमें साफ-साफ कहा गया है कि इस ऐप के जरिए कांफ्रेंस रूम में एक अनवांछित एंट्री हो रही है। इसको ध्यान में रखते हुए कुछ सेटिंग्स में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। खास तौर पर लॉक मीटिंग को एडमिनिस्ट्रेटर ओनली करने को कहा गया है। साथ ही, पासवर्ड शेयर करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के मुताबिक, ऐप की सेटिंग्स में नीचे दिए गए बदलाव कहने को कहा गया है –
  • हर मीटिंग के दौरान नया यूजर आईडी और पासवर्ड क्रिएट करने को कहा गया है।
  • ऐप में वेटिंग रूम क्रिएट करें ताकि कोई भी यूजर मीटिंग में तभी एंटर कर सकेंगे जब होस्ट उसे एंट्री करने की परमिशन देगा।
  • वीडियो कांफ्रेंस होस्ट करने से पहले होस्ट फीचर को डिसेबल करने के लिए कहा गया है।
  • अल्टर्नेटिव होस्ट स्क्रीन शेयरिंग सेटिंग्स को होस्ट ओनली में करने के लिए कहा गया है।
  • रिमूव्ड पार्टिशिपेन्ट्स को दोबारा ज्वॉइन करने की परमिशन नहीं देने के लिए कहा गया है।
  • फाइल ट्रांसफर को रिस्ट्रिक्ट या डिसेबल करने की सलाह दी गई है।
  • जब सभी पार्टिशिपेंट्स ज्वॉइन कर लेते हैं तो मीटिंग को लॉक करने की सलाह दी गई है।
  • इसके अलावा रिकॉर्डिंग फीचर को रिस्ट्रिक्ट करने के लिए भी निर्देश दिया गया है।

आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से इस वीडियो कांफ्रेंसिंग ऐप्स के जरिए डाटा लीक्स जैसी कई खबरें सामने आ रहीं थी। पिछले दिनों ही एक रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक, जिसमें Zoom अकाउंट्स की डिटेल्स 15 पैसे से कम कीमत में ऑनलाइन बेचे जाने के बारे में बताया गया था।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि Zoom ऐप से निजता की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे हैं। टिक टॉक और जूम के ज्यादातर सर्वर चीन में हैं और इनमें कुछ कमजोरियां हैं। तकनीकी विश्लेषण कहता है कि इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप से मीटिंग का डाटा लीक हो सकता है।

एक अधिकारी ने कहा कि कारोबारी हों या सरकारी अधिकारी कृपया इसका इस्तेमाल ना करें। भारत की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने पहले ही उपयोगकर्ताओं को इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप में लगाई जाने वाली सेंध को लेकर जागरूक किया था। पासवर्ड लीक होने और हैकर्स द्वारा वीडियो कॉल कांफ्रेंस के दौरान हाईजैक किए जाने की शिकायतों के बाद गाइडलाइन जारी की गई।

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