अंतर्राष्ट्रीय महाराजा दाहरसेन ऑनलाइन संगोष्ठी सम्पन्न

आज सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन का 1308वां बलिदान दिवस मनाया जायेगा

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ऑनलाइन परिचर्चा में भाग लेते हुए अमेरिका के साहित्यकार सूफी लघारी ने कहा कि महाराजा दाहरसेन के बलिदान को देश दुनिया में याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान के हर शहर में राजा दाहरसेन का स्मारक व मार्ग का नाम रखना चाहिये जिससे महान योद्धा का इतिहास लोगों तक पहुंच सके।

अजमेर (विसं.)। सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन विकास व समारोह समिति द्वारा महाराजा दाहरसेन के 1308वें बलिदान वर्ष के उपलक्ष में अंर्तराष्ट्रीय महाराजा दाहरसेन ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन सोमवार, 15 जून 2020 को सायं 6 बजे से किया गया, जिसका प्रसारण यूट्यूब व फेसबुक के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर हुआ।

अंतर्राष्ट्रीय महाराजा दाहरसेन ऑनलाइन संगोष्ठी में भाग लेते हुए महामण्डलेश्वर हंसराम उदासीन ने कहा कि संसार का सिरमौर सिन्ध व महाराजा दाहरसेन के बगैर बात करना बेमानी होगी। तीन सुधारे देश को – सन्त, सती व सूर। दुनिया में पहली बार जौहर महारानी लाडी बाई ने किया।

उन्होंने कहा कि अपना अंश व वंश कभी नहीं जाता है और हमें सिन्ध मिलेगी। सिन्ध है तो हिन्द है और पाकिस्तान ने सिन्धियों को भुला दिया है जिससे सिन्ध व पाकिस्तान की यह दशा हुई है और आज भी दुनिया से सिन्धियों को सिन्ध से जोड़ा जाये जिससे सिन्ध को बसाया जाये।

महाराज ने कहा कि लखावत ने महाराजा दाहरसेन स्मारक एक तीर्थ स्थान के रूप में बनाया है। निरंतर गतिविधियों से युवा पीढ़ी का जुड़ाव हुआ है। ऐसी संगोष्ठियों का आयोजन प्रतिमाह किया जाना चाहिये, जिससे अलग-अलग विषयों में सिन्ध के इतिहास की जानकारी हो सके।

संगोष्ठी में वक्ता पूर्व सांसद ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि सिन्ध भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। हम संकल्प लें कि जब तक सिन्ध मिलकर भारत का अभिन्न हिस्सा बनेगा। सिन्ध केवल जमीन का टुकडा नहीं है वह संस्कृति है। सिन्ध के बिना हिन्द की कल्पना नहीं कर सकते हैं। शिक्षा का केन्द्र सिन्ध, व्यापार का केन्द्र सिन्ध है। हमारी भक्ति व शक्ति का केन्द्र सिन्ध है।

लखावत ने कहा कि अखण्ड भारत की महान शक्ति हिंगलाज शक्ति पीठ है। बिना सिन्ध के हिन्द में जिन्दा कैसे रह सकते हैं। सिन्धु से ही हिन्दू की उत्पति हुई है। महाराजा दाहरसेन ने खलीफों से युद्ध लड़ा और उन्होंने बडे़ हमलों का मुकाबला किया। उनकी वीरांगना पत्नि लाडी बाई व पुत्रियां सूर्यकुमारी व परमाल ने भी मुकाबला किया। उन्होंने बप्पा रावल के बलिदान का जिक्र करते हुये सिन्ध से उनका जुड़ाव बताया।

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अमेरिका के साहित्यकार सूफी लघारी ने कहा कि महाराजा दाहरसेन के बलिदान को देश दुनिया में याद किया जाता है और भारत सरकार को इतिहास में जोड़कर पढ़ाया जाये जिससे युवा पीढ़ी को ऐसी गौरव गाथा की जानकारी हो। सिन्ध में आज भी बच्चों के नाम दाहर रखा जा रहा है। इतिहास को सही लिखने की आवश्यकता है जिससे सिन्ध के महापुरूषों व संतो के जीवन पढ़ा जाये। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान के हर शहर में राजा दाहरसेन का स्मारक व मार्ग का नाम रखना चाहिये जिससे महान योद्धा का इतिहास लोगों तक पहुंच सके।

भारतीय सिन्धु सभा के राष्ट्रीय मंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने कहा कि 1997 में महाराजा दाहरसेन स्मारक का निर्माण हुआ था। समारोह समिति व सिन्धु सभा की ओर से अलग-अलग गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहा है जिसमें बलिदान दिवस, जयंती दिवस व अलग अलग महापुरूषों के प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे हैं और सिन्धु सभा का ध्येय वाक्य है कि सिन्ध मिलकर अखण्ड भारत बनेगा और इसी परिकल्पना में आज की संगोष्ठी सार्थक प्रयास है और देश भर की इकाईयों की ओर से ऐसे आयोजन किये जा रहे हैं। आगामी 2021 वर्ष स्मारक का रजत जयंती वर्ष है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कंवल प्रकाश ने संगोष्ठी की विस्तृत रूपरेखा रखते हुये कहा कि आज इस लाॅकडाउन के कारण यह ऑनलाइन संगोष्ठी देश-दुनिया में अपनी एक अलग पहचान छोडे़गी तथा महाराजा दाहरसेन के जीवन की गौरव गाथा लोगों तक पहुंचाने तक एक मील का पत्थर साबित होगी।

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सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन

बलिदान दिवस पर आज अर्पित किये जाएंगे श्रद्धासुमन

कार्यक्रम समन्वयक मोहन तुलस्यिाणी ने बताया कि आज मंगलवार, 16 जून को महाराजा दाहरसेन के 1308वें बलिदान दिवस के उपलक्ष में विभिन्न संस्थाओं व संगठनों द्वारा हिंगलाज माता पूजन व महाराजा दाहरसेन को श्रद्धासुमन अर्पित किये जाएंगे।

उन्होने बताया कि महाराजा दाहरसेन पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, पर्यटन विभाग सहित सिन्धु शोधपीठ, मदस विश्वविद्यालय का सहयोग रहता है। इस अवसर पर देशभक्ति आधारित कार्यक्रमों के साथ विद्यार्थियों के लिये चित्र भरो प्रतियोगता, निबंध व आलेख प्रतियोगिता व ज्ञानवर्धक प्रश्नोतरी का आयोजन किया गया।सभी प्रतियोगिताओं के विजेताओं का शीघ्र ही कार्यक्रम आयोजित कर सम्मान किया जायेगा।

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