नहीं रहे सिन्धी समाज के पितामह जस्टिस इंद्रसेन इसरानी

राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश इन्द्रसेन इसरानी का निधन

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राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश थे इसरानी, कई आयोगों के अध्यक्ष भी रह चुके। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एम्पावर्ड कमेटी में भी रहे शामिल। बीमारी के चलते हुआ निधन। इसरानी के निधन से सिंधी समाज में छाई शोक की लहर। मुख्यमंत्री ने जताया शोक।

जयपुर (विसं.)। सिंधी समाज के प्रमुख आधार स्तंभ और राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंद्रसेन इसरानी का निधन हो गया है। वे पिछले एक माह से बीमार थे और विगत 6 मई से खाना-पीना बंद होने के कारण जयपुर के इटरनल हाॅस्पीटल में उनका उपचार चल रहा था।

पित्ताशय में पथरी सहित पीलिया से पीड़ित होने के कारण पिछले कई दिनों से उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी और आज उन्होंने आखिरी सांस ली। इससे पहले हालत नहीं सुधरने पर आज उनके लीवर में स्टैंड डालने के लिए ऑपरेशन किया गया। जिसके पांच मिनट बाद ही हृदयघात से उनका निधन हो गया।

उनके दोनों पुत्र और पुत्री अमेरिका में रहते हैं। अन्त समय में उनके छोटे पुत्र हितेश मुम्बई से जयपुर आ गये थे।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंद्रसेन इसरानी के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने न्यायमूर्ति इसरानी के परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए, दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

इसरानी के निधन से सिंधी समाज में छाई शोक की लहर

जस्टिस इंद्रसेन इसरानी के निधन का समाचार सुनकर सिंधी समाज में शोक व्याप्त हो गया। समाज की अनेक पूज्य सिंधी पंचायतों और संस्थाओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी नेे यह कहा कि जस्टिस इंद्रसेन इसरानी सिंधी समाज के महत्वपूर्ण स्तंभ थे। सिंधी भाषा के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए उनके द्वारा प्रदत्त सहयोग को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

सिन्धी समाज के पितामह की भूमिका निभाई

जस्टिस इंद्रसेन इसरानी का जन्म 16 अप्रैल 1931 को सिंध (वर्तमान-पाकिस्तान) में हुआ। उनके पिता दीवान सीरूमलल जी एक स्वतंत्रता सेनानी थे और देश की स्वतंत्रता के लिए चलाए जा रहे आंदोलन में अनेक बार जेल भी गए। उनके पिता सिंध असेंबली के स्पीकर भी रहे। देश विभाजन के बाद वह भारत आकर जयपुर में बस गए।

राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश थे इसरानी

जस्टिस इंद्रसेन इसरानी ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.ए., एलएल.बी. की उपाधि प्राप्त की और एक एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस करने लगे। जस्टिस इंद्रसेन इसरानी सन् 1985 से 1994 तक राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे और जनहित के अनेक फैसले दिए।

कई आयोगों के अध्यक्ष भी रह चुके

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जस्टिस इंद्रसेन इसरानी सन् 1994 से 2002 तक राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन रहे और सन् 2004 से 2006 में सवाईमाधोपुर में हुए गोलीकांड की जांच के लिए गठित इसरानी जांच आयोग के चेयरमैन भी रहे। सन् 2007 से जस्टिस इंद्रसेन इसरानी राज्य बाल कल्याण एवं किशोर न्याय बोर्ड के चेयरमैन भी रहे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एम्पावर्ड कमेटी में भी रहे शामिल

जस्टिस इसरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा सन् 2011 में बनाई गई एंपावर्ड कमेटी के दो जजों में से एक रहे, जिन्होंने जयपुर को विश्व स्तरीय शहर बनाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया। इसके साथ ही इसरानी राजस्थान राज्य में प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेज रेगुलेटरी ऑथोरिटी के भी चेयरमैन भी रहे। इसरानी को सन् 2012 में पुनः राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का चेयरमैन मनोनीत किया गया।

सिंधी भाषा के उत्थान के लिए दिया अमूल्य योगदान

जस्टिस इसरानी सिंधी भाषा के उत्थान के लिए जीवन पर्यंत कार्य करते रहे, वे राजस्थान सिंधी अकादमी के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के सदस्य भी रहे।

जस्टिस इंद्रसेन इसरानी विगत 18 वर्षों से सेंट मीरा ब्रदरहुड सोसाइटी के चेयरमैन रहे है। सोसाइटी द्वारा अनेक शिक्षण संस्थान बिना लाभ के आधार पर चलाए जा रहे हैं जिसके अंतर्गत मीरा गर्ल्स कॉलेज, एस.वी. पब्लिक स्कूल, साधु वासवानी सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं।

ऐसी महान शख्सियत के निधन पर सिंधु गौरव परिवार की ओर से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा सभी परिवारजनों, शुभचिंतकों को यह असीम दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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